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As a poet

Sometimes i feel myself as a poet .No no ca’t say but sometimes i used to write somethings..now u people decide that what i m..

very shortly i will upload all my stuffs.

Here is one (But Not Mine).

विवाह

विवाह एक सुंदर शब्द
एक मिठास भरी आवाज़
एक‌ पवित्र बंधन
एक‌ मधुर‌ धुन
एक‌ चंचल चाहत
एक‌ प्यारा मिलन
एक‌ संपूर्णता का अहसास
एक ज़िम्मेदार पहल
एक सामाजिकता का आवरण
एक‌ सभ्यता का उदय
एक‌ न‌व‌जीव‌न का सृजन
एक दूसरे के सुख‌ का ख्याल
एक‌ अप‌नेप‌न की भावना
एक ज‌न्मों-ज‌नमों का साथ
एक‌ सादगी अनोखी सहजता
एक सुखद अहसास
एक‌ समझदारी भरा निर्णय
एक आगे बढ़ने की ललक
एक सुंदर भविष्य की झलक
एक‌ फूलों का बंधन
एक इंतज़ार की आहट
एक आकाश को छूने की चाहत
एक ग़ज़ब‌ का आत्मविश्वास
एक मुश्किलों से ल‌ड़‌ने की ताकत
एक जादू भरा शब्द
जिसका ख्याल आए हर‌ वक्त
एक पावन प्यार भरी पहल
विवाह‌ को अपना कर
जीवन‌ को बना ए मित्र
‘अमित’ तू भी सफल।।

अनमने दिन

 

दिन बीते
रीते-रीते
    इन सूनी राहों पे
मिला न कोई राही
बना न कोई साथी
    वन सूखे चाहों के
याद न कोई आतान मन को कोई भाता
    घेरे खाली हैं बाहों के
कलप रहा है तन
जैसे भू-अगन
    दिन आए फिर कराहों के
अनिल जनविजय

रोज़‌ हमेशा खुश रहो
 

ज़िंदगी में हैं कितने पल‌
जीवन‌ रहे या न‌ रहे कल
रोज़‌ हमेशा खुश रहो
बंद कर देखना भ‌विष्य‌फ‌ल
छोड़‌ चिंता कल‌ की
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

हर‌ पल‌ है मूल्यवान
है तू भाग्यवान
रोज़ हमेशा खुश रहो।
दिल‌ कि ध‌क‌-ध‌क
देती है तुम्हें ये हक
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

हर‌ घड़ी में है मस्ती
देखो है ये कितनी सस्ती
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।
कम कर अपनी व्यस्तता
जीने का निकालो सही रास्ता
रोज़ हमेशा खुश रहो।

प‌ल‌-प‌ल‌ में जीना सीखो
चेहरे पर लाकर‌ मुस्कान
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

काम‌ नहीं होगा कभी ख़त्म
उसमें से ही निकालो वक्त
रोज़ हमेशा खुश रहो।

दुश्मनी में न‌ करो समय बरबाद
दोस्तों से कर‌ लो अपनी दुनिया आबाद
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

कर‌ ग़रीबों का भला
पाओ मन‌ का सुकून
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

ख़्वाबों से बाहर‌ निकल
रंग बिरंगी दुनिया देखो
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

कम‌ कर‌ अपनी चाहत‌
बन‌ कर दूसरों का सहारा
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

बाँट कर दुख‌ दर्द सबका
भुला कर‌ अपना पराया
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

जीवन को ना तौल पैसों से
ये तो है अनमोल
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

सुख‌ और दुख को पहचान‌
है ये जीवन‌ का रस
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

ईश्वर‌ ने बनाया सबको एक‌ है
तू भी ब‌न‌क‌र‌ नेक
रोज़ हमेशा खुश रहो।

अपने साथ‌ दूसरों के आँसू पोंछ
पीकर ग़म पराया
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

खुश र‌ह‌क‌र बाँटो खुशियाँ
मुसकुराते हुए बिखेरो फूलों की कलियाँ
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

बाँध ले तू ये गाँठ
समझ ले मेरी बात
पढ़ कर‌ मेरी कविता बार-बार‌
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।
रोज़‌ हमेशा खुश रहो।

2 Responses to “As a poet”

  1. Deepti said

    Just ve to say that…
    Add something written by u…I knw u r a very very good poet!!!!
    ;-)

  2. जियो गूरू..
    आपने तो बस मचा दिया है.. और मै आपको दाद, खाज, खुजली सब देता हूॅ.. बस लगे रहीये.. बस एक आग्रह है, इसमे से फ़ाॅन्ट हटा दिजीये.. अच्छा नही लग रहा है और पढने मे भी परेशानी हो रही है…

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